Shree Krushnah Sharnam Mamah

SHRI KRUSHNA SHARANAM MAMAH:
श्री कृष्णः शरणं ममः


याको शब्दार्थ
श्री — शब्दकरीके मुख्य स्वामिनीजी
कृष्ण — शब्दकरके पुरषोत्तम एसे युगलस्वरुप
शरण — शरण शब्द तें आश्रय होय.
ममः — कहीये मोकुं. अर्थात्– युगलस्वरुप को मोकुं आश्रय होय
ओर अन्यको आश्रय सगरो अनित्यहे, नाशवानहे, सो कोनसो, सो कहतहें. जो देह, स्त्री, पुत्र,पुत्री. माता,पिता,
भगिनी, कुटुंब,ग्रह,वित्त,पशु,गाम,देश,राजा,इन सबनको जो आश्रय हे सो सगरो अनित्यहे. भ्रमात्मकहे,नाशवानहे,
क्षणिकहे. ओर भगवद आश्रय है सो नित्यहै. आननदस्वरुप हे,यहलोक परलोकको देवेवारो हे,तातें अन्याश्रयनिवर्त
पूर्वक भगवदाश्रय होय..